अन्वयः
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यत्र स्त्री यत्र कितवः यत्र बालः प्रशासिता (भवति), तत् गृहं क्षयम् आयाति, हि भार्गवः इदम् अब्रवीत् ।
Summary
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A household where a woman, a gambler, or a child is the ruler inevitably faces ruin; this is the teaching of Bhārgava.
सारांश
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भार्गव के अनुसार, जिस घर या शासन की बागडोर किसी स्त्री, जुआरी अथवा बालक के हाथ में होती है, वह शीघ्र ही विनाश को प्राप्त हो जाता है।
पदच्छेदः
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| यत्र | यत्र | where |
| स्त्री | स्त्री (१.१) | woman |
| यत्र | यत्र | where |
| कितवः | कितव (१.१) | gambler |
| बालः | बाल (१.१) | child |
| यत्र | यत्र | where |
| प्रशासिता | प्रशासितृ (प्र√शास्+तृच्, १.१) | ruler |
| तत् | तत् (१.१) | that |
| गृहम् | गृह (१.१) | house |
| क्षयम् | क्षय (२.१) | destruction |
| आयाति | आयाति (आ√या कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | comes to |
| भार्गवः | भार्गव (१.१) | Bhrigu's son (Shukra) |
| हि | हि | indeed |
| इदम् | इदम् (२.१) | this |
| अब्रवीत् | अब्रवीत् (√ब्रू कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | said |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| य | त्र | स्त्री | य | त्र | कि | त | वो |
| बा | लो | य | त्र | प्र | शा | सि | ता |
| त | द्गृ | हं | क्ष | य | मा | या | ति |
| भा | र्ग | वो | ही | द | म | ब्र | वीत् |
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