कुपुत्रोऽपि भवेत्पुंसां हृदयानन्दकारकः ।
दुर्विनीतः कुरूपोऽपि मूर्खोऽपि व्यसनी खलः ॥

अन्वयः AI दुर्विनीतः कुरूपः अपि मूर्खः अपि व्यसनी खलः अपि कुपुत्रः पुंसां हृदय-आनन्द-कारकः भवेत्।
Summary AI Even a bad son—be he ill-mannered, ugly, foolish, addicted to vices, or wicked—can still bring joy to the hearts of his parents.
सारांश AI चाहे पुत्र उद्दंड, कुरूप, मूर्ख या दुष्ट ही क्यों न हो, वह अपने माता-पिता के हृदय को आनंद ही प्रदान करता है।
पदच्छेदः AI
अपरीक्ष्यपरीक्ष्य (परि√ईक्ष्+ल्यप्) without examining
not
कर्तव्यम्कर्तव्य (√कृ+तव्य, १.१) should be done
कर्तव्यम्कर्तव्य (√कृ+तव्य, १.१) should be done
सु-परीक्षितम्सुपरीक्षित (परि√ईक्ष्+क्त, १.१) well-examined
पश्चात्पश्चात् afterwards
भवतिभवति (√भू कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) occurs/becomes
सन्तापःसन्ताप (१.१) regret/distress
ब्राह्मणीब्राह्मणी (१.१) Brahmin woman
नकुलम्नकुल (२.१) mongoose
यथायथा just as
छन्दः अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
कु पु त्रो ऽपि वे त्पुं सां
हृ या न्द का कः
दु र्वि नी तः कु रू पो ऽपि
मू र्खो ऽपि व्य नी लः
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