अन्वयः
AI
अत्र नापितेन यत् कृतम्, तत् कुक्कुटम् कु-परिज्ञातं कु-श्रुतं कु-परीक्षितं नरेण न कर्तव्यम्।
Summary
AI
A person should never perform an action that is poorly understood, ill-heard, or unexamined, just as the barber did in this instance.
सारांश
AI
जो कार्य ठीक से परखा या समझा न गया हो, उसे मनुष्य को कदापि नहीं करना चाहिए, जैसा कि इस कथा में नाई ने किया।
पदच्छेदः
AI
| जीर्यन्ते | जीर्यन्ते (√जॄ कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. बहु.) | they decay/grow old |
| जीर्यतः | जीर्यत् (√जॄ+शतृ, ६.१) | of one who is decaying/aging |
| केशाः | केश (१.३) | hairs |
| दन्ताः | दन्त (१.३) | teeth |
| जीर्यन्ति | जीर्यन्ति (√जॄ कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | they decay/grow old |
| चक्षुः | चक्षुस् (१.१) | eye |
| श्रोत्रे | श्रोत्र (१.२) | ears |
| च | च | and |
| जीर्येते | जीर्येते (√जॄ कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. द्वि.) | they two decay/grow old |
| तृष्णा | तृष्णा (१.१) | craving/thirst |
| एका | एक (१.१) | one/alone |
| तरुणायते | तरुणायते (√तरुणाय कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | becomes young/remains young |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| कु | क्कु | टं | कु | प | रि | ज्ञा | तं |
| कु | श्रु | तं | कु | प | री | क्षि | तम् |
| त | न्न | रे | ण | न | क | र्त | व्यं |
| ना | पि | ते | ना | त्र | य | त्कृ | तम् |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.