अन्वयः
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यत्र साम अथवा अपि वा दानम् कर्तुम् न शक्यते तत्र भेदः प्रयोक्तव्यः यतः सः वश-कारकः।
Summary
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Where conciliation or even bribery cannot be employed, there dissension must be used, for it is effective in bringing others under control.
सारांश
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जहाँ साम और दान का प्रयोग संभव न हो, वहाँ भेद नीति अपनानी चाहिए क्योंकि वह शत्रु को वश में करने वाली होती है।
पदच्छेदः
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| न | न | not |
| यत्र | यत्र | where |
| शक्यते | शक्यते (√शक् भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | is possible |
| कर्तुम् | कर्तुम् (√कृ+तुमुन्) | to do |
| साम | सामन् (१.१) | conciliation |
| दानम् | दान (१.१) | gift |
| अथ | अथ | then |
| अपि | अपि | even |
| वा | वा | or |
| भेदः | भेद (१.१) | division/dissension |
| तत्र | तत्र | there |
| प्रयोक्तव्यः | प्र (प्र√प्र)–प्रयोक्तव्य (√युज्+तव्य, १.१) | should be employed |
| यतः | यतस् | because |
| सः | तद् (१.१) | it |
| वश-कारकः | वश–कारक (१.१) | subjugator |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| न | य | त्र | श | क्य | ते | क | र्तुं |
| सा | म | दा | न | म | था | पि | वा |
| भे | द | स्त | त्र | प्र | यो | क्त | व्यो |
| य | तः | स | व | श | का | र | कः |
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