अन्वयः
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मयि ते पाद-पतिते किङ्करत्वम् उपागते (सति), कोपने! त्वम् कस्मात् कोपम् एष्यसि (हे) प्राण-वल्लभे?
Summary
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Since I have fallen at your feet and become your servant, O angry one, why do you still harbor anger, O mistress of my life?
सारांश
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हे प्राणप्रिये! जब मैं स्वयं तुम्हारे चरणों में गिरकर तुम्हारा दास बन गया हूँ, तो तुम मुझ पर क्रोध क्यों कर रही हो?
पदच्छेदः
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| मयि | अस्मद् (७.१) | in me/on me |
| ते | युष्मद् (६.१) | your |
| पाद-पतिते | पाद–पतित (√पत्+क्त, ७.१) | fallen at feet |
| किङ्करत्वं | किङ्करत्व (२.१) | servitude |
| उपागते | उपागत (उप+आ√गम्+क्त, ७.१) | having attained |
| त्वं | युष्मद् (१.१) | you |
| प्राण-वल्लभे | प्राण–वल्लभा (८.१) | O dearest life |
| कस्मात् | किम् (५.१) | why |
| कोपने | कोपना (८.१) | O angry one |
| कोपम् | कोप (२.१) | anger |
| एष्यसि | एष्यसि (√इ कर्तरि लृट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | you will attain/show |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| म | यि | ते | पा | द | प | ति | ते |
| कि | ङ्क | र | त्व | मु | पा | ग | ते |
| त्वं | प्रा | ण | व | ल्ल | भे | क | स्मा |
| त्को | प | ने | को | प | मे | ष्य | सि |
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