अन्वयः
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हतः त्वं स्वर्गं प्राप्स्यसि, जीवन् गृहम् अथो यशः (प्राप्स्यसि); युध्यमानस्य ते अनुत्तमम् गुण-द्वयम् भावि।
Summary
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If slain in battle, you shall attain heaven; if you survive, you shall enjoy your home and fame. For one who fights, two unsurpassed rewards await.
सारांश
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युद्ध में वीरगति पाने पर स्वर्ग मिलेगा और जीवित रहने पर यश और घर; इस प्रकार युद्ध करने वाले के लिए दोनों ही स्थितियों में श्रेष्ठ लाभ है।
पदच्छेदः
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| हतः | हत (√हन्+क्त, १.१) | slain |
| त्वम् | युष्मद् (१.१) | you |
| प्राप्स्यसि | प्र (प्र√प्र)–प्राप्स्यसि (√आप् कर्तरि लृट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | will obtain |
| स्वर्गम् | स्वर्ग (२.१) | heaven |
| जीवन् | जीवत् (√जीव्+शतृ, १.१) | living |
| गृहम् | गृह (२.१) | home |
| अथो | अथो | and/then |
| यशः | यशस् (२.१) | fame |
| युध्यमानस्य | युध्यमान (√युध्+शानच्, ६.१) | of one fighting |
| ते | युष्मद् (६.१) | your |
| भावि | भावि (√भू+भविष्यत्कृत्, १.१) | will be |
| गुण-द्वयम् | गुण–द्वय (१.१) | two qualities |
| अनुत्तमम् | अनुत्तम (१.१) | excellent |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ह | त | स्त्वं | प्रा | प्स्य | सि | स्व | र्गं |
| जी | व | न्गृ | ह | म | थो | य | शः |
| यु | ध्य | मा | न | स्य | ते | भा | वि |
| गु | ण | द्व | य | म | नु | त्त | मम् |
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