अन्वयः
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मित्रं हि अमित्रतां यातम्, मे प्रिया मित्रा अपरम् (याता); गृहम् च अन्येन व्याप्तम्; अद्य अपि किम् भविष्यति?
Summary
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My friend has turned into an enemy, and my beloved companion has left. My home is now occupied by another; what will become of me now?
सारांश
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मित्र शत्रु बन गया, मेरी प्रिया दूसरे की हो गई और घर पर किसी और का अधिकार हो गया; अब आगे और क्या होगा?
पदच्छेदः
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| मित्रम् | मित्र (१.१) | undefined |
| हि | हि | undefined |
| अमित्रताम् | अमित्रता (२.१) | undefined |
| यातम् | यात (√या+क्त, १.१) | undefined |
| अपरम् | अपर (१.१) | undefined |
| मे | अस्मद् (६.१) | undefined |
| प्रिया | प्रिया (१.१) | undefined |
| मित्रा | मित्र (१.१) | undefined |
| गृहम् | गृह (१.१) | undefined |
| अन्येन | अन्य (३.१) | undefined |
| च | च | undefined |
| व्याप्तम् | व्याप्त (वि√आप्+क्त, १.१) | undefined |
| किम् | किम् | undefined |
| अद्य | अद्य | undefined |
| अपि | अपि | undefined |
| भविष्यति | भविष्यति (√भू कर्तरि लृट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | undefined |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| मि | त्रं | ह्य | मि | त्र | तां | या | त |
| म | प | रं | मे | प्रि | या | मि | त्रा |
| गृ | ह | म | न्ये | न | च | व्या | प्तं |
| कि | म | द्या | पि | भ | वि | ष्य | ति |
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