अन्वयः
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बालः रूक्षायाम् स्नेह-सद्-भावम्, कठोरायाम् सु-मार्दवम्, नीरसायाम् रसं बालिकायाम् विकल्पयेत्।
Summary
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Like an ignorant child, a man foolishly imagines true affection in a harsh woman, gentle softness in a cruel one, and delight in one who is devoid of any real feeling.
सारांश
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मूर्ख व्यक्ति रूखी स्त्री में प्रेम, कठोर में कोमलता और नीरस स्त्री में रस की कल्पना करता है।
पदच्छेदः
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| रूक्षायाम् | रूक्षा (७.१) | undefined |
| स्नेह-सद्-भावम् | स्नेह-सद्-भाव (२.१) | undefined |
| कठोरायाम् | कठोरा (७.१) | undefined |
| सु-मार्दवम् | सु-मार्दव (२.१) | undefined |
| नीरसायाम् | नीरसा (७.१) | undefined |
| रसम् | रस (२.१) | undefined |
| बालः | बाल (१.१) | undefined |
| बालिकायाम् | बालिका (७.१) | undefined |
| विक विकल्पयेत् | विकल्पयेत् (वि√कॢप् कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | undefined |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| रू | क्षा | यां | स्ने | ह | स | द्भा | वं |
| क | ठो | रा | यां | सु | मा | र्द | वम् |
| नी | र | सा | यां | र | सं | बा | लो |
| बा | लि | का | यां | वि | क | ल्प | येत् |
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