अन्वयः
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यस्य गृहे माता न अस्ति, प्रिय-वादिनी भार्या च न अस्ति, तेन अरण्यं गन्तव्यम्; यथा अरण्यं तथा गृहम्।
Summary
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A man whose home lacks a mother and a sweet-speaking wife should retire to the forest, for his house is no different from the wilderness.
सारांश
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जिसके घर में माँ नहीं है और पत्नी मधुर बोलने वाली नहीं है, उसे वन चले जाना चाहिए; क्योंकि उसके लिए घर और वन एक समान ही हैं।
पदच्छेदः
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| माता | मातृ (१.१) | mother |
| यस्य | यद् (६.१) | whose |
| गृहे | गृह (७.१) | in house |
| न | न | not |
| अस्ति | अस्ति (√अस् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | is |
| भार्या | भार्या (१.१) | wife |
| च | च | and |
| प्रिय-वादिनी | प्रिय–वादिन् (√वादिनी+णिनि, १.१) | sweet-speaking |
| अरण्यम् | अरण्य (२.१) | forest |
| तेन | तद् (३.१) | by him |
| गन्तव्यम् | गन्तव्य (√गम्+तव्य, २.१) | should be gone to |
| यथा | यथा | as |
| अरण्यम् | अरण्य (१.१) | forest |
| तथा | तथा | so |
| गृहम् | गृह (१.१) | house |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| मा | ता | य | स्य | गृ | हे | ना | स्ति |
| भा | र्या | च | प्रि | य | वा | दि | नी |
| अ | र | ण्यं | ते | न | ग | न्त | व्यं |
| य | था | र | ण्यं | त | था | गृ | हम् |
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