अन्वयः
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गृहं गृहं न इति आहुः, गृहिणी गृहम् उच्यते, गृहिणी-हीनं गृहं तु कान्तारात् न अति-रिच्यते ।
Summary
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They say a house is not a home; the wife is called the home. A home without a wife is no different from a wilderness.
सारांश
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ईंट-पत्थर के घर को घर नहीं कहते, बल्कि गृहणी ही वास्तविक घर है; गृहणी के बिना घर घने जंगल के समान होता है।
पदच्छेदः
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| न | न | not |
| गृहम् | गृह (१.१) | house |
| गृहम् | गृह (२.१) | house |
| इति | इति | thus |
| आहुः | आहुः (आ√ब्रू कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | they say |
| गृहिणी | गृहिणी (१.१) | housewife |
| गृहम् | गृह (१.१) | house |
| उच्यते | उच्यते (√वच् +यक् भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | is called |
| गृहम् | गृह (१.१) | house |
| तु | तु | but |
| गृहिणी-हीनम् | गृहिणी–हीन (√हीन+क्त, १.१) | devoid of a housewife |
| कान्तारात् | कान्तार (५.१) | from a forest |
| न | न | not |
| अतिरिच्यते | अतिरिच्यते (अति√रिच् +यक् भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | differs |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| न | गृ | हं | गृ | ह | मि | त्या | हु |
| र्गृ | हि | णी | गृ | ह | मु | च्य | ते |
| गृ | हं | तु | गृ | हि | णी | ही | नं |
| का | न्ता | रा | न्ना | ति | रि | च्य | ते |
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