गात्रं सङ्कुचितं गतिविगलिता दन्ताश्च नाशं गता-
ह्दृष्टिर्भ्राम्यति रूपमेव ह्रसते वक्त्रं च लालायते ।
वाक्यं नैव करोति बान्धवजनः पत्नी न शुश्रूषते
हा कष्टं जरयाभिभूतपुरुषः पुत्रैरवज्ञायते ॥
गात्रं सङ्कुचितं गतिविगलिता दन्ताश्च नाशं गता-
ह्दृष्टिर्भ्राम्यति रूपमेव ह्रसते वक्त्रं च लालायते ।
वाक्यं नैव करोति बान्धवजनः पत्नी न शुश्रूषते
हा कष्टं जरयाभिभूतपुरुषः पुत्रैरवज्ञायते ॥
ह्दृष्टिर्भ्राम्यति रूपमेव ह्रसते वक्त्रं च लालायते ।
वाक्यं नैव करोति बान्धवजनः पत्नी न शुश्रूषते
हा कष्टं जरयाभिभूतपुरुषः पुत्रैरवज्ञायते ॥
अन्वयः
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गात्रं सङ्कुचितम्, गतिः विगलिता, दन्ताः च नाशं गताः, दृष्टिः भ्राम्यति, रूपम् एव ह्रसते, वक्त्रं च लालायते, बान्धव-जनः वाक्यं न एव करोति, पत्नी न शुश्रूषते, हा कष्टम्! जरया अभिभूत-पुरुषः पुत्रैः अवज्ञायते ।
Summary
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The body shrinks, the gait falters, teeth fall out, vision blurs, beauty fades, and the mouth slavers. Relatives ignore his words, his wife does not serve him, and alas, a man overcome by old age is despised even by his sons.
सारांश
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अंग शिथिल होने, दांत गिरने और मुख से लार टपकने पर वृद्धावस्था में संबंधी और पत्नी सेवा नहीं करते तथा पुत्र भी अपमान करते हैं।
पदच्छेदः
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| गात्रम् | गात्र (१.१) | body |
| सङ्कुचितम् | सङ्कुचित (सम्√कुच्+क्त, १.१) | shrunken |
| गति-विगलिता | गति–विगलित (√विगलिता+क्त, १.१) | gait falters |
| दन्ताः | दन्त (१.३) | teeth |
| च | च | and |
| नाशम् | नाश (२.१) | destruction |
| गताः | गत (√गम्+क्त, १.३) | gone to |
| दृष्टिः | दृष्टि (१.१) | eyesight |
| भ्राम्यति | भ्राम्यति (√भ्रम् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | wanders |
| रूपम् | रूप (१.१) | beauty |
| एव | एव | indeed |
| ह्रसते | ह्रसते (√ह्रस् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | diminishes |
| वक्त्रम् | वक्त्र (१.१) | mouth |
| च | च | and |
| लालायते | लालायते (√लालाय कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | drools |
| वाक्यम् | वाक्य (२.१) | words |
| न | न | not |
| एव | एव | even |
| करोति | करोति (√कृ कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | does |
| बान्धव-जनः | बान्धव–जन (१.१) | relatives |
| पत्नी | पत्नी (१.१) | wife |
| न | न | not |
| शुश्रूषते | शुश्रूषते (√श्रु +सन् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | serves |
| हा | हा | alas |
| कष्टम् | कष्ट (१.१) | misery |
| जरया | जरा (३.१) | by old age |
| अभिभूत-पुरुषः | अभिभूत (√अभिभूत+क्त)–पुरुष (१.१) | man overcome |
| पुत्रैः | पुत्र (३.३) | by sons |
| अवज्ञायते | अवज्ञायते (अव√ज्ञा +यक् भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | is disrespected |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| गा | त्रं | स | ङ्कु | चि | तं | ग | ति | वि | ग | लि | ता | द | न्ता | श्च | ना | शं | ग | ता |
| ह्दृ | ष्टि | र्भ्रा | म्य | ति | रू | प | मे | व | ह्र | स | ते | व | क्त्रं | च | ला | ला | य | ते |
| वा | क्यं | नै | व | क | रो | ति | बा | न्ध | व | ज | नः | प | त्नी | न | शु | श्रू | ष | ते |
| हा | क | ष्टं | ज | र | या | भि | भू | त | पु | रु | षः | पु | त्रै | र | व | ज्ञा | य | ते |
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