अन्वयः
AI
यस्य गृहात् अपूजितः अतिथिः विनिःश्वसन् याति, तस्य पितरः दैवतैः सह विमुखाः गच्छन्ति ।
Summary
AI
From whose house an unhonored guest departs sighing in disappointment, his ancestors along with the deities turn their faces away and leave.
सारांश
AI
जिसके घर से अतिथि सत्कार न पाकर लंबी आहें भरता हुआ लौट जाता है, उसके पितर और देवता भी मुख मोड़ लेते हैं।
पदच्छेदः
AI
| अपूजितः | अपूजित (अप्√पूज्+क्त, १.१) | unhonored |
| अतिथिः | अतिथि (१.१) | guest |
| यस्य | यद् (६.१) | whose |
| गृहात् | गृह (५.१) | from house |
| याति | याति (√या कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | goes |
| विनिःश्वसन् | विनिःश्वसत् (वि+निस्√श्वस्+शतृ, १.१) | sighing |
| गच्छन्ति | गच्छन्ति (√गम् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | go |
| पितरः | पितृ (१.३) | ancestors |
| तस्य | तद् (६.१) | his |
| विमुखाः | वि–मुख (१.३) | with averted faces |
| सह | सह | with |
| दैवतैः | दैवत (३.३) | deities |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | पू | जि | तो | ऽति | थि | र्य | स्य |
| गृ | हा | द्या | ति | वि | निः | श्व | सन् |
| ग | च्छ | न्ति | पि | त | र | स्त | स्य |
| वि | मु | खाः | स | ह | दै | व | तैः |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.