अन्वयः
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आत्मनः मुख-दोषेण शुक-सारिकाः बध्यन्ते, तत्र बकाः न बध्यन्ते, मौनं सर्व-अर्थ-साधनम् (अस्ति) ।
Summary
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Parrots and starlings are caged because of their own speech, while cranes are not; silence is the means to achieve all ends.
सारांश
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तोते और मैना अपनी वाणी के दोष के कारण पिंजरे में बँध जाते हैं, जबकि बगुले नहीं बँधते; वास्तव में मौन रहना ही सर्वार्थ सिद्ध करने वाला है।
पदच्छेदः
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| आत्मनः | आत्मन् (६.१) | of oneself |
| मुख-दोषेण | मुख–दोष (३.१) | by the fault of the mouth/speech |
| बध्यन्ते | बध्यन्ते (√बन्ध् भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. बहु.) | are bound/caught |
| शुक-सारिकाः | शुक–सारिका (१.३) | parrots and mynahs |
| बकाः | बक (१.३) | cranes |
| तत्र | तत्र | there |
| न | न | not |
| बध्यन्ते | बध्यन्ते (√बन्ध् भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. बहु.) | are bound/caught |
| मौनम् | मौन (१.१) | silence |
| सर्वार्थ-साधनम् | सर्व–अर्थ–साधन (१.१) | means to achieve all purposes |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| आ | त्म | नो | मु | ख | दो | षे | ण |
| ब | ध्य | न्ते | शु | क | सा | रि | काः |
| ब | का | स्त | त्र | न | ब | ध्य | न्ते |
| मौ | नं | स | र्वा | र्थ | सा | ध | नम् |
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