अन्वयः
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यद्-अर्थे स्व-कुलं त्यक्तं जीवित-अर्धं च हारितम्, सा निःस्नेहा मां त्यजति, कः नरः स्त्रीणां विश्वसेत्?
Summary
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She, for whose sake I abandoned my own family and lost half my life, now leaves me without affection; what man can trust women?
सारांश
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जिसके लिए कुल छोड़ दिया और आधा जीवन गँवा दिया, वही निष्ठुर होकर मुझे छोड़ रही है; स्त्रियों पर कौन पुरुष विश्वास कर सकता है?
पदच्छेदः
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| यद्-अर्थे | यद्–अर्थ (७.१) | for whose sake |
| स्व-कुलं | स्व–कुल (२.१) | one's own family |
| त्यक्तं | त्यक्त (√त्यज्+क्त, २.१) | abandoned |
| जीवितार्धं | जीवित–अर्ध (२.१) | half of life |
| च | च | and |
| हारितम् | हारित (√हृ+णिच्+क्त, २.१) | lost |
| सा | तद् (१.१) | she |
| मां | अस्मद् (२.१) | me |
| त्यजति | त्यजति (√त्यज् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | abandons |
| निःस्नेहा | निःस्नेह (१.१) | without affection |
| कः | किम् (१.१) | who |
| स्त्रीणां | स्त्री (६.३) | of women |
| विश्वसेन्नरः | विश्वसेत् (वि√विश् कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.)–नर (१.१) | would trust a man |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| य | द | र्थे | स्व | कु | लं | त्य | क्तं |
| जी | वि | ता | र्धं | च | हा | रि | तम् |
| सा | मां | त्य | ज | ति | निः | स्ने | हा |
| कः | स्त्री | णां | वि | श्व | से | न्न | रः |
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