अन्वयः
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यस्य शीलम् न, कुलम् न, च संश्रयः न जायते, तेन सङ्गतिम् न कुर्यात् इति बृहस्पतिः उवाच ।
Summary
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Bṛhaspati stated that one should not form an association with a person whose character, lineage, and background are unknown.
सारांश
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बृहस्पति के अनुसार, जिसके स्वभाव, कुल और आश्रय का ज्ञान न हो, उसके साथ कभी संगति नहीं करनी चाहिए।
पदच्छेदः
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| यस्य | यद् (६.१) | whose |
| न | न | not |
| जायते | जायते (√जन् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | is born |
| शीलम् | शील (१.१) | character |
| न | न | not |
| कुलम् | कुल (१.१) | family |
| न | न | not |
| च | च | and |
| संश्रयः | संश्रय (१.१) | support |
| न | न | not |
| तेन | तद् (३.१) | with him |
| सङ्गतिम् | सङ्गति (२.१) | association |
| कुर्यात् | कुर्यात् (√कृ कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | one should make |
| इति | इति | thus |
| उवाच | उवाच (√वच् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | said |
| बृहस्पतिः | बृहस्पति (१.१) | Brihaspati |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| य | स्य | न | जा | य | ते | शी | लं |
| न | कु | लं | न | च | सं | श्र | यः |
| न | ते | न | स | ङ्ग | तिं | कु | र्या |
| दि | त्यु | वा | च | बृ | ह | स्प | तिः |
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