अन्वयः
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यः च सकृत् दुष्टम् मित्रम् पुनः सन्धातुम् इच्छति, सः गर्भम् अश्वतरी यथा मृत्युम् उपगृह्णाति ।
Summary
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He who desires to reunite with a friend who has turned treacherous once, embraces his own death, just as a female mule does when she conceives.
सारांश
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जो दुष्ट मित्र से पुनः संधि करना चाहता है, वह अपनी मृत्यु को वैसे ही निमंत्रण देता है जैसे खच्चरी गर्भधारण कर अपनी मृत्यु का कारण बनती है।
पदच्छेदः
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| सकृत् | सकृत् | once |
| दुष्टम् | दुष्ट (√दुष्+क्त, २.१) | corrupted |
| च | च | and |
| यः | यद् (१.१) | who |
| मित्रम् | मित्र (२.१) | friend |
| पुनः | पुनर् | again |
| सन्धातुम् | सन्धातुम् (सम्√धा+तुम्)–सन्धातु | to reconcile |
| इच्छति | इच्छति (√इष् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | desires |
| सः | तद् (१.१) | he |
| मृत्युम् | मृत्यु (२.१) | death |
| उपगृह्णाति | उपगृह्णाति (उप√ग्रह् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | embraces |
| गर्भम् | गर्भ (२.१) | fetus |
| अश्वतरी | अश्वतरी (१.१) | mule |
| यथा | यथा | just as |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | कृ | द्दु | ष्टं | च | यो | मि | त्रं |
| पु | नः | स | न्धा | तु | मि | च्छ | ति |
| स | मृ | त्यु | मु | प | गृ | ह्णा | ति |
| ग | र्भ | म | श्व | त | री | य | था |
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