अन्वयः
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प्राज्ञ-तरः नरः कौलिक-आकारम् मित्रम् वर्जयेत्, यः लोलुपः आत्मनः सम्मुखम् नित्यम् आकर्षति ।
Summary
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A very wise man should avoid a friend who acts like a weaver, who greedily and constantly pulls everything toward himself.
सारांश
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बुद्धिमान मनुष्य को उस लालची मित्र का त्याग कर देना चाहिए जो जुलाहे की चरखी के समान केवल अपनी ओर ही खींचता है।
पदच्छेदः
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| वर्जयेत् | वर्जयेत् (√वृज् कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | should avoid |
| कौलिकाकारं | कौलिक–आकार (२.१) | having the appearance of a weaver/low character |
| मित्रं | मित्र (२.१) | friend |
| प्राज्ञतरः | प्राज्ञतर (१.१) | wiser |
| नरः | नर (१.१) | man |
| आत्मनः | आत्मन् (६.१) | of oneself |
| सम्मुखं | सम्मुख (२.१) | towards oneself |
| नित्यं | नित्य | always |
| यः | यद् (१.१) | who |
| आकर्षति | आकर्षति (आ√कृष् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | draws/pulls |
| लोलुपः | लोलुप (१.१) | greedy |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| व | र्ज | ये | त्कौ | लि | का | का | रं |
| मि | त्रं | प्रा | ज्ञ | त | रो | न | रः |
| आ | त्म | नः | स | म्मु | खं | नि | त्यं |
| य | आ | क | र्ष | ति | लो | लु | पः |
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