अन्वयः
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यस्य धर्म-विहीनानि दिनानि आयान्ति यान्ति च सः लोहकार-भस्त्रा इव श्वसन् अपि न जीवति ॥
Summary
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A person whose days pass without the practice of dharma does not truly live. Such a person merely breathes, much like the bellows in a blacksmith's shop.
सारांश
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जिस व्यक्ति का दिन धर्म के बिना बीतता है, वह लोहार की धौंकनी के समान है जो केवल श्वास लेती है पर जीवित नहीं कहलाती।
पदच्छेदः
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| यस्य | यद् (६.१) | whose |
| धर्म-विहीनानि | धर्म–विहीन (१.३) | devoid of dharma |
| दिनानि | दिन (१.३) | days |
| आयान्ति | आयान्ति (आ√या कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | come |
| यान्ति | यान्ति (√या कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | go |
| च | च | and |
| सः | तद् (१.१) | he |
| लोहकार-भस्त्रा | लोहकार–भस्त्रा (१.१) | blacksmith's bellows |
| इव | इव | like |
| श्वसन् | श्वसत् (√श्वस्+शतृ, १.१) | breathing |
| अपि | अपि | even |
| न | न | not |
| जीवति | जीवति (√जीव् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | lives |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| य | स्य | ध | र्म | वि | ही | ना | नि |
| दि | ना | न्या | या | न्ति | या | न्ति | च |
| स | लो | ह | का | र | भ | स्त्रे | व |
| श्व | स | न्न | पि | न | जी | व | ति |
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