अन्वयः
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वापी-कूप-तडागानां देवालय-कु-जन्मनाम् उत्सर्गात् परतः स्वाम्यम् अपि कर्तुं न शक्यते ॥
Summary
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Once step-wells, wells, ponds, temples, and lands are formally consecrated or donated for public use, no individual can claim ownership over them again.
सारांश
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बावड़ी, कुएँ, तालाब और मंदिरों के जनहित में दान किए जाने के बाद, उन पर पूर्व स्वामी का कोई व्यक्तिगत अधिकार नहीं रह जाता।
पदच्छेदः
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| वापी-कूप-तडागानाम् | वापी–कूप–तडाग (६.३) | of step-wells, wells, and ponds |
| देवालय-कुजन्मनाम् | देव–आलय–कुजन्मन् (६.३) | of temples and low-born individuals |
| उत्सर्गात् | उत्सर्ग (५.१) | from dedication/giving away |
| परतः | परतः | afterwards |
| स्वाम्यम् | स्वाम्य (१.१) | ownership |
| अपि | अपि | even |
| कर्तुम् | कर्तुम् (√कृ+तुम्) | to do/make |
| न | न | not |
| शक्यते | शक्यते (√शक् भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | is possible |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| वा | पी | कू | प | त | डा | गा | नां |
| दे | वा | ल | य | कु | ज | न्म | नाम् |
| उ | त्स | र्गा | त्प | र | तः | स्वा | म्य |
| म | पि | क | र्तुं | न | श | क्य | ते |
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