अन्वयः
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प्राण-संशयम् विज्ञाय अनार्येण अपि सन्धिः कार्यः, यतः प्राणैः संरक्षितैः सर्वम् रक्षितम् भवति ।
Summary
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One should make peace even with an ignoble person if life is at risk; for if life is preserved, everything else is saved.
सारांश
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प्राणों पर संकट आने पर दुष्ट शत्रु के साथ भी संधि कर लेनी चाहिए, क्योंकि प्राण सुरक्षित रहने पर ही सब कुछ सुरक्षित रहता है।
पदच्छेदः
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| सन्धिः | सन्धि (१.१) | a treaty |
| कार्यः | कार्य (√कृ+ण्यत्, १.१) | should be made |
| अप्यनार्येण | अपि–अनार्य (३.१) | even with a wicked person |
| विज्ञाय | विज्ञाय (वि√ज्ञा+ल्यप्) | having known |
| प्राण-संशयम् | प्राण–संशय (२.१) | danger to life |
| प्राणैः | प्राण (३.३) | by lives |
| संरक्षितैः | संरक्षित (सम्√रक्ष्+क्त, ३.३) | protected |
| सर्वं | सर्व (१.१) | everything |
| यतो | यतः | because |
| भवति | भवति (√भू कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | becomes |
| रक्षितम् | रक्षित (√रक्ष्+क्त, १.१) | protected |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | न्धिः | का | र्यो | ऽप्य | ना | र्ये | ण |
| वि | ज्ञा | य | प्रा | ण | सं | श | यम् |
| प्रा | णैः | सं | र | क्षि | तैः | स | र्वं |
| य | तो | भ | व | ति | र | क्षि | तम् |
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