अन्वयः
AI
असहायः समर्थः तेजस्वी अपि किं करिष्यति? निर्-वाते ज्वलितः वह्निः स्वयम् एव प्रशाम्यति।
Summary
AI
What can even a powerful and brilliant person do without assistance? Fire, though burning brightly, is extinguished on its own in a place without wind to fan it.
सारांश
AI
सहायता विहीन होने पर सामर्थ्यवान व्यक्ति भी क्या कर सकता है? वायु का साथ न मिलने पर प्रज्वलित अग्नि भी स्वयं ही शांत हो जाती है।
पदच्छेदः
AI
| असहायः | अ–सहाय (१.१) | helpless |
| समर्थः | समर्थ (१.१) | capable |
| अपि | अपि | even |
| तेजस्वी | तेजस्विन् (१.१) | brilliant |
| किम् | किम् | what |
| करिष्यति | करिष्यति (√कृ कर्तरि लृट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | will he do |
| निर्वाते | निर्–वात (७.१) | in a windless place |
| ज्वलितः | ज्वलित (√ज्वल्+क्त, १.१) | burning |
| वह्निः | वह्नि (१.१) | fire |
| स्वयम् | स्वयम् | by itself |
| एव | एव | only |
| प्रशाम्यति | प्रशाम्यति (प्र√शम् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | extinguishes |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | स | हा | यः | स | म | र्थो | ऽपि |
| ते | ज | स्वी | किं | क | रि | ष्य | ति |
| नि | र्वा | ते | ज्व | लि | तो | व | ह्निः |
| स्व | य | मे | व | प्र | शा | म्य | ति |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.