अन्वयः
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यतः एक-जः महान् बलवान् सुप्रतिष्ठितः अपि वृक्षः वातेन प्रसह्य धर्षयितुं शक्यः इव भवति।
Summary
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For even a large, strong, and well-rooted tree, if it stands alone, can be easily overpowered and struck down by the wind.
सारांश
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अकेला खड़ा विशाल और बलवान वृक्ष भी अपनी जड़ों के बावजूद तीव्र वायु द्वारा बलपूर्वक उखाड़ा जा सकता है।
पदच्छेदः
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| महान् | महत् (१.१) | great |
| अपि | अपि | even |
| एक-जः | एक–ज (१.१) | born alone |
| वृक्षः | वृक्ष (१.१) | a tree |
| बलवान् | बलवत् (१.१) | strong |
| सुप्रतिष्ठितः | सुप्रतिष्ठित (सु+प्रति√स्था+क्त, १.१) | well-established |
| प्रसह्य | प्रसह्य (प्र√सह्+ल्यप्) | forcibly |
| इव | इव | as if |
| वातेन | वात (३.१) | by the wind |
| शक्यः | शक्य (√शक्+ण्यत्, १.१) | is capable |
| धर्षयितुम् | धर्षयितुम् (√धृष्+तुमुन्+णिच्) | to be assailed |
| यतः | यतः | because |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| म | हा | न | प्ये | क | जो | वृ | क्षः |
| ब | ल | वा | न्सु | प्र | ति | ष्ठि | तः |
| प्र | स | ह्य | इ | व | वा | ते | न |
| श | क्यो | ध | र्ष | यि | तुं | य | तः |
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