अन्वयः
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निज-स्थान-स्थितः एकः नरः अपि शतं योद्धुं सहेत्। तस्मात् शक्तानाम् शत्रूणां भयात् स्थानं न सन्त्यजेत्।
Summary
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A single man staying in his own place can withstand a hundred fighters. Therefore, one should not abandon his position even out of fear of powerful enemies.
सारांश
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अपने स्थान पर डटा हुआ एक व्यक्ति भी सौ शत्रुओं का सामना कर सकता है, इसलिए सामर्थ्यवान शत्रु के सामने भी अपना स्थान नहीं छोड़ना चाहिए।
पदच्छेदः
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| निज-स्थान-स्थितः | निज–स्थान–स्थित (१.१) | situated in one's own place |
| अपि | अपि | even |
| एकः | एक (१.१) | a single |
| शतम् | शत (२.१) | a hundred |
| योद्धुम् | योद्धुम् (√युध्+तुमुन्) | to fight |
| सहेत् | सहेत् (√सह् कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | can endure |
| नरः | नर (१.१) | a man |
| शक्तानाम् | शक्त (६.३) | of powerful ones |
| अपि | अपि | even |
| शत्रूणाम् | शत्रु (६.३) | of enemies |
| तस्मात् | तद् | therefore |
| स्थानम् | स्थान (२.१) | place |
| न | न | not |
| सन्त्यजेत् | सन्त्यजेत् (सम्√त्यज् कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | should abandon |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| नि | ज | स्था | न | स्थि | तो | ऽप्ये | कः |
| श | तं | यो | द्धुं | स | हे | न्न | रः |
| श | क्ता | ना | म | पि | श | त्रू | णां |
| त | स्मा | त्स्था | नं | न | स | न्त्य | जेत् |
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