दंष्ट्राविरहितः सर्पो मदहीनो यथा गजः ।
स्थानहीनस्तथा राजा गम्यः स्यात्सर्वजन्तुषु ॥

अन्वयः AI यथा दंष्ट्रा-विरहितः सर्पः, यथा मद-हीनः गजः, तथा स्थान-हीनः राजा सर्व-जन्तुषु गम्यः स्यात्।
Summary AI Just as a serpent without fangs or an elephant without rut, a king who has lost his position becomes vulnerable to all creatures.
सारांश AI बिना विषैले दांतों के सर्प और मदहीन हाथी की भांति, अपने स्थान से च्युत राजा सभी के द्वारा दबाया जा सकता है।
पदच्छेदः AI
दंष्ट्रा-विरहितःदंष्ट्राविरहित (१.१) devoid of fangs
सर्पःसर्प (१.१) a snake
मद-हीनःमदहीन (१.१) devoid of ichor (or pride)
यथायथा just as
गजःगज (१.१) an elephant
स्थान-हीनःस्थानहीन (१.१) devoid of place
तथातथा similarly
राजाराजन् (१.१) a king
गम्यःगम्य (√गम्+ण्यत्, १.१) approachable (vulnerable)
स्यात्स्यात् (√अस् कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) would be
सर्व-जन्तुषुसर्वजन्तु (७.३) among all creatures
छन्दः अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
दं ष्ट्रा वि हि तः र्पो
ही नो था जः
स्था ही स्त था रा जा
म्यः स्या त्स र्व न्तु षु
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