अन्वयः
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बलवता अभियुक्तः प्रयत्नवान् दुर्गे तिष्ठन् तत्र-स्थः आत्म-विमुक्तये सुहृत्-आह्वानं कुर्वीत।
Summary
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One attacked by a powerful foe should remain diligent within a fortress. From there, he should summon his allies for his own liberation.
सारांश
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शक्तिशाली शत्रु के आक्रमण पर सावधानी से दुर्ग में रहना चाहिए और वहां रहते हुए अपनी रक्षा के लिए मित्रों की सहायता लेनी चाहिए।
पदच्छेदः
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| अभियुक्तः | अभियुक्त (अभि√युज्+क्त, १.१) | attacked |
| बलवता | बलवत् (३.१) | by a strong one |
| तिष्ठन् | तिष्ठत् (√स्था+शतृ, १.१) | remaining |
| दुर्गे | दुर्ग (७.१) | in a fortress |
| प्रयत्नवान् | प्रयत्नवत् (१.१) | diligent |
| तत्रस्थः | तत्र–स्थ (१.१) | staying there |
| सुहृत् | सुहृद् (१.१) | a friend |
| आह्वानम् | आह्वान (आ√ह्वे+ल्युट्, २.१) | a call |
| कुर्वीत | कुर्वीत (√कृ कर्तरि विधिलिङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | should make |
| आत्म-विमुक्तये | आत्मन्–विमुक्ति (४.१) | for one's own liberation |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | भि | यु | क्तो | ब | ल | व | ता |
| ति | ष्ठ | न्दु | र्गे | प्र | य | त्न | वान् |
| त | त्र | स्थः | सु | हृ | दा | ह्वा | नं |
| कु | र्वी | ता | त्म | वि | मु | क्त | ये |
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