उत्साहशक्तिसम्पन्नो हन्याच्छत्रुं लघुर्गुरुम् ।
यथा कण्ठीरवो नागं भारद्वाजः प्रचक्षते ॥

अन्वयः AI उत्साह-शक्ति-सम्पन्नः लघुः गुरुम् शत्रुम् हन्यात् । यथा कण्ठीरवः नागम् (हन्ति) । भारद्वाजः प्रचक्षते ॥
Summary AI A person endowed with energy and power can destroy a much larger enemy, just as a lion kills an elephant. This is the teaching of the sage Bhāradvāja.
सारांश AI उत्साह और शक्ति से संपन्न छोटा व्यक्ति भी बड़े शत्रु को मार सकता है, जैसे सिंह विशाल हाथी का वध कर देता है।
पदच्छेदः AI
उत्साह-शक्ति-सम्पन्नःउत्साहशक्तिसम्पन्न (सम्√सम्पन्न+क्त, १.१) endowed with energy and power
हन्यात्हन्यात् (√हन् कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) should kill
शत्रुम्शत्रु (२.१) an enemy
लघुःलघु (१.१) small
गुरुम्गुरु (२.१) large
यथायथा just as
कण्ठीरवःकण्ठीरव (१.१) a lion
नागम्नाग (२.१) an elephant
भारद्वाजःभारद्वाज (१.१) Bharadvaja
प्रचक्षतेप्रचक्षते (प्र√चक्ष् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. बहु.) they say
छन्दः अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
त्सा क्ति म्प न्नो
न्या च्छ त्रुं घु र्गु रुम्
था ण्ठी वो ना गं
भा द्वा जः प्र क्ष ते
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