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सिद्धिं प्रार्थयता जनेन विदुषा तेजो निगृह्य स्वकं
सत्त्वोत्साहवतापि दैवविधिषु स्थैर्यं प्रकार्य क्रमात् ।
देवेन्द्रद्रविणेश्वरान्तकसमैरप्यन्वितो भ्रातृभिः
किं क्लिष्टः सुचिरं विराटभवने श्रीमान्न धर्मात्मजः ॥

अन्वयः AI सिद्धिम् प्रार्थयता विदुषा सत्त्व-उत्साह-वता अपि जनेन स्वकं तेजः निगृह्य दैव-विधिषु क्रमात् स्थैर्यम् प्रकार्य, देवेन्द्र-द्रविणेश्वर-अन्तक-समैः अपि भ्रातृभिः अन्वितः श्रीमान् धर्म-आत्मजः विराट-भवने सु-चिरं किं न क्लिष्टः ?
Summary AI A wise person seeking success must restrain his brilliance and maintain stability against fate. Did the glorious Yudhiṣṭhira, though accompanied by brothers equal to Indra, Kubera, and Yama, not suffer for a long time in Virāṭa’s palace?
सारांश AI सफलता चाहने वाले विद्वान को अपने तेज को रोककर धैर्य रखना चाहिए; इंद्र और यम के समान शक्तिशाली भाइयों वाले युधिष्ठिर ने भी विराट के भवन में लंबे समय तक कष्ट सहा था।
पदच्छेदः AI
सिद्धिंसिद्धि (२.१) success
प्रार्थयताप्रार्थयत् (प्र√अर्थ्+शतृ, ३.१) by one seeking
जनेनजन (३.१) by a person
विदुषाविद्वस् (३.१) by the wise
तेजःतेजस् (२.१) splendor/brilliance
निगृह्यनिगृह्य (नि√ग्रह्+ल्यप्) having suppressed
स्वकंस्वक (२.१) one's own
सत्त्वोत्साहवतापिसत्त्वउत्साहवत् (३.१)अपि even though possessing courage and enthusiasm
दैव-विधिषुदैवविधि (७.३) in matters of destiny
स्थैर्यंस्थैर्य (२.१) steadiness/patience
प्रकार्यप्रकार्य (प्र√कृ+ल्यप्) having performed/maintained
क्रमात्क्रम (५.१) gradually
देवेन्द्र-द्रविणेश्वरान्तक-समैःदेवेन्द्रद्रविणेश्वरअन्तकसम (३.३) equal to Indra, Kubera, and Yama
अपिअपि even
अन्वितःअन्वित (अनु√इ+क्त, १.१) accompanied
भ्रातृभिःभ्रातृ (३.३) by brothers
किंकिं why/what
क्लिष्टःक्लिष्ट (√क्लिश्+क्त, १.१) distressed
सुचिरंसुचिर for a long time
विराट-भवनेविराटभवन (७.१) in the Matsya kingdom
श्रीमान्श्रीमत् (१.१) illustrious
not
धर्मात्मजःधर्मआत्मज (१.१) Yudhishthira
छन्दः शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११ १२ १३ १४ १५ १६ १७ १८ १९
सि द्धिं प्रा र्थ ता ने वि दु षा ते जो नि गृ ह्य स्व कं
त्त्वो त्सा ता पि दै वि धि षु स्थै र्यं प्र का र्य क्र मात्
दे वे न्द्र द्र वि णे श्व रा न्त मै प्य न्वि तो भ्रा तृ भिः
किं क्लि ष्टः सु चि रं वि रा ने श्री मा न्न र्मा त्म जः
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