शक्तेनापि सता जनेन विदुषा कालान्तरापेक्षिणा
वस्तव्यं खलु वाक्यवज्रविषमे क्षुद्रेऽपि पापे जने ।
दर्वीव्यग्रकरेण धूममलिनेनायासयुक्तेन च
भीमेनातिबलेन मत्स्यभवने किं नोषितं सूदवत् ॥

अन्वयः AI शक्तेन अपि सता विदुषा जनेन काल-अन्तर-अपेक्षिणा वाक्य-वज्र-विषमे क्षुद्रे अपि पापे जने खलु वस्तव्यम् । अति-बलेन भीमेन दर्वी-व्यग्र-करेण धूम-मलिनेन आयास-युक्तेन च मत्स्य-भवने सूद-वत् किं न उषितम् ?
Summary AI A wise and capable person, awaiting the right time, must endure living among wicked people who speak harsh words. Did the mighty Bhīma not live in Virāṭa’s palace as a cook, his hands busy with a ladle and stained by smoke?
सारांश AI शक्ति संपन्न विद्वान को भी सही समय की प्रतीक्षा में नीच और कठोर वचन बोलने वाले लोगों के बीच रहना पड़ता है; जैसे महाबली भीम विराट के भवन में रसोइया बनकर रहे थे।
पदच्छेदः AI
शक्तेनशक्त (√शक्+क्त, ३.१) by the capable
अपिअपि even
सतासत् (√अस्+शतृ, ३.१) being
जनेनजन (३.१) by a person
विदुषाविद्वस् (३.१) by the wise
कालान्तरापेक्षिणाकालअन्तरअपेक्षिन् (३.१) awaiting the right time
वस्तव्यंवस्तव्य (√वस्+तव्य, १.१) should be resided
खलुखलु indeed
वाक्य-वज्र-विषमेवाक्यवज्रविषम (७.१) harsh with words like a thunderbolt
क्षुद्रेक्षुद्र (७.१) lowly
अपिअपि even
पापेपाप (७.१) wicked
जनेजन (७.१) person
दर्वी-व्यग्र-करेणदर्वीव्यग्रकर (३.१) with hands busy with ladles
धूम-मलिनेनधूममलिन (३.१) stained by smoke
आयास-युक्तेनआयासयुक्त (३.१) full of toil
and
भीमेनभीम (३.१) by Bhima
अतिबलेनअतिबल (३.१) exceedingly strong
मत्स्य-भवनेमत्स्यभवन (७.१) in the Matsya kingdom
किंकिं why/what
not
उषितंउषित (√वस्+क्त, १.१) resided
सूदवत्सूदवत् like a cook
छन्दः शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११ १२ १३ १४ १५ १६ १७ १८ १९
क्ते ना पि ता ने वि दु षा का ला न्त रा पे क्षि णा
स्त व्यं लु वा क्य ज्र वि मे क्षु द्रे ऽपि पा पे ने
र्वी व्य ग्र रे धू लि ने ना या यु क्ते
भी मे ना ति ले त्स्य ने किं नो षि तं सू वत्
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