उपनतभये यो यो मार्गो हितार्थकरो भवेत्
स स निपुणया बुद्ध्या सेव्यो महान्कृपणोऽपि वा ।
करिकरनिभौ ज्याघाता कौ महास्त्रविशारदौ
वलयरचितौ स्त्रीवद्बाहू कृतौ न किरीटिना ॥
उपनतभये यो यो मार्गो हितार्थकरो भवेत्
स स निपुणया बुद्ध्या सेव्यो महान्कृपणोऽपि वा ।
करिकरनिभौ ज्याघाता कौ महास्त्रविशारदौ
वलयरचितौ स्त्रीवद्बाहू कृतौ न किरीटिना ॥
स स निपुणया बुद्ध्या सेव्यो महान्कृपणोऽपि वा ।
करिकरनिभौ ज्याघाता कौ महास्त्रविशारदौ
वलयरचितौ स्त्रीवद्बाहू कृतौ न किरीटिना ॥
अन्वयः
AI
उपनत-भये यः यः मार्गः हित-अर्थ-करः भवेत्, सः सः निपुणया बुद्ध्या सेव्यः महान् कृपणः अपि वा । किरीटिना करि-कर-निभौ ज्या-घात-अङ्कौ महा-अस्त्र-विशारदौ बाहू स्त्री-वत् वलय-रचितौ न कृतौ ?
Summary
AI
When danger arises, one should employ any means—noble or lowly—that proves beneficial through clever intellect. Did Arjuna, the expert in missiles, not adorn his powerful arms, scarred by bowstrings and resembling elephant trunks, with bangles like a woman while in hiding?
सारांश
AI
संकट आने पर जो भी मार्ग हितकर हो, चाहे वह श्रेष्ठ हो या निम्न, बुद्धिमान को उसे अपनाना चाहिए; जैसे अर्जुन ने अपनी शक्तिशाली भुजाओं में स्त्रियों के समान चूड़ियाँ धारण की थीं।
पदच्छेदः
AI
| उपनत-भये | उपनत–भय (७.१) | when fear has approached |
| यः | यद् (१.१) | which |
| यः | यद् (१.१) | which |
| मार्गः | मार्ग (१.१) | path |
| हितार्थ-करः | हितार्थ–कर (१.१) | beneficial |
| भवेत् | भवेत् (√भू कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | should be |
| सः | तद् (१.१) | that |
| सः | तद् (१.१) | that |
| निपुणया | निपुण (३.१) | by skillful |
| बुद्ध्या | बुद्धि (३.१) | intelligence |
| सेव्यः | सेव्य (√सेव्+ण्यत्, १.१) | to be resorted to |
| महान् | महत् (१.१) | great |
| कृपणः | कृपण (१.१) | humble/pitiable |
| अपि | अपि | even |
| वा | वा | or |
| करिकर-निभौ | करिकर–निभ (१.२) | resembling elephant's trunks |
| ज्याघाताङ्कौ | ज्याघात–अङ्क (१.२) | marked by bowstring scars |
| महास्त्र-विशारदौ | महास्त्र–विशारद (१.२) | expert in great weapons |
| वलय-रचितौ | वलय–रचित (१.२) | adorned with bracelets |
| स्त्रीवत् | स्त्रीवत् | like a woman |
| बाहू | बाहु (१.२) | arms |
| कृतौ | कृत (√कृ+क्त, १.२) | made |
| न | न | not |
| किरीटिना | किरीटिन् (३.१) | by Arjuna |
छन्दः
हरिणी [१७: नसमरसलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| उ | प | न | त | भ | ये | यो | यो | मा | र्गो | हि | ता | र्थ | क | रो | भ | वे |
| त्स | स | नि | पु | ण | या | बु | द्ध्या | से | व्यो | म | हा | न्कृ | प | णो | ऽपि | वा |
| क | रि | क | र | नि | भौ | ज्या | घा | ता | कौ | म | हा | स्त्र | वि | शा | र | दौ |
| व | ल | य | र | चि | तौ | स्त्री | व | द्बा | हू | कृ | तौ | न | कि | री | टि | ना |
| न | स | म | र | स | ल | ग | ||||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.