अन्वयः
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यः नरः शीघ्र-कृत्येषु कार्येषु विलम्बयति, तस्य तत् कृत्यं देवताः कोपात् असंशयम् विघ्नन्ति ।
Summary
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If a man delays tasks that require immediate action, the gods, out of anger, undoubtedly place obstacles in the completion of that work.
सारांश
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जो मनुष्य शीघ्र करने योग्य कार्यों में विलंब करता है, देवता क्रोधित होकर उस कार्य में निश्चित ही विघ्न डाल देते हैं।
पदच्छेदः
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| शीघ्र-कृत्येषु | शीघ्र–कृत्य (७.३) | in urgent tasks |
| कार्येषु | कार्य (७.३) | in matters |
| विलम्बयति | विलम्बयति (वि√लम्ब् +णिच् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | delays |
| यः | यद् (१.१) | who |
| नरः | नर (१.१) | a person |
| तत् | तद् (१.१) | that |
| कृत्यम् | कृत्य (१.१) | task |
| देवताः | देवता (१.३) | the deities |
| तस्य | तद् (६.१) | his |
| कोपात् | कोप (५.१) | out of anger |
| विघ्नन्ति | विघ्नन्ति (वि√हन् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | obstruct |
| असंशयम् | असंशयम् | without doubt |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| शी | घ्र | कृ | त्ये | षु | का | र्ये | षु |
| वि | ल | म्ब | य | ति | यो | न | रः |
| त | त्कृ | त्यं | दे | व | ता | स्त | स्य |
| को | पा | द्वि | घ्न | न्त्य | सं | श | यम् |
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