समः शत्रौ च मित्रे च सम-लोष्टाश्म-काञ्चनः ।
सुहृन्-मित्रे ह्युदासीनो मध्यस्थो द्वेष्य-बन्धुषु ।
साधुष्वपि च पापेषु सम-बुद्धिर्विशिष्यते ॥
समः शत्रौ च मित्रे च सम-लोष्टाश्म-काञ्चनः ।
सुहृन्-मित्रे ह्युदासीनो मध्यस्थो द्वेष्य-बन्धुषु ।
साधुष्वपि च पापेषु सम-बुद्धिर्विशिष्यते ॥
सुहृन्-मित्रे ह्युदासीनो मध्यस्थो द्वेष्य-बन्धुषु ।
साधुष्वपि च पापेषु सम-बुद्धिर्विशिष्यते ॥
अन्वयः
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यः शत्रौ च मित्रे च समः सम-लोष्ट-अश्म-काञ्चनः सुहृत्-मित्रे हि उदासीनः द्वेष्य-बन्धुषु मध्यस्थः साधुषु अपि च पापेषु च सम-बुद्धिः विशिष्यते ॥
Summary
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He who remains equal toward enemies and friends, views clods of earth, stones, and gold alike, stays indifferent to well-wishers, neutral among the hateful and kin, and maintains an even mind toward the virtuous and sinful, is considered superior.
सारांश
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जो शत्रु और मित्र, मिट्टी, पत्थर और स्वर्ण में समान भाव रखता है तथा हितैषी, उदासीन, मध्यस्थ, द्वेषी, संबंधी, साधु और पापियों के प्रति समबुद्धि रखता है, वही श्रेष्ठ है।
पदच्छेदः
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| समः | सम (१.१) | equal |
| शत्रौ | शत्रु (७.१) | in an enemy |
| च | च | and |
| मित्रे | मित्र (७.१) | in a friend |
| च | च | and |
| सम-लोष्टाश्म-काञ्चनः | सम–लोष्ट–अश्मन्–काञ्चन (१.१) | one to whom clod, stone, and gold are equal |
| सुहृन्-मित्रे | सुहृत्–मित्र (७.१) | in well-wishers and friends |
| हि | हि | indeed |
| उदासीनो | उदासीन (१.१) | indifferent |
| मध्यस्थो | मध्यस्थ (१.१) | neutral |
| द्वेष्य-बन्धुषु | द्वेष्य–बन्धु (७.३) | among hated relatives |
| साधुष्वपि | साधु (७.३)–अपि | even among good people |
| च | च | and |
| पापेषु | पाप (७.३) | among wicked people |
| सम-बुद्धिर्विशिष्यते | सम–बुद्धि (१.१)–विशिष्यते (वि√विशिष् भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | one with equal intellect/mind excels |
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