अन्वयः
AI
द्विज! यथा द्वि-जातीनाम् भक्ष्यम्, यथा मद्य-पानाम् हविः अभक्ष्यम्, तथा अन्येषाम् अपि अभक्ष्यम् भक्ष्यताम् एति ।
Summary
AI
O Brāhmaṇa, just as the food of the twice-born is unfit for drunkards, and the sacrificial offering is unfit for them, so too does forbidden food become acceptable for others according to their nature.
सारांश
AI
हे द्विज! जैसे ब्राह्मणों के लिए विशिष्ट भोजन, मद्यपियों के लिए मदिरा और देवताओं के लिए हवि निर्धारित है, वैसे ही जो एक के लिए वर्जित है, वह दूसरे का भोजन हो सकता है।
पदच्छेदः
AI
| भक्ष्यम् | भक्ष्य (√भक्ष्+ण्यत्, १.१) | edible |
| यथा | यथा | just as |
| द्विजातीनाम् | द्विजति (६.३) | of the twice-born |
| मद्यपानाम् | मद्य–पा (६.३) | of liquor drinkers |
| यथा | यथा | just as |
| हविः | हविस् (१.१) | oblation |
| अभक्ष्यम् | अभक्ष्य (१.१) | forbidden food |
| भक्ष्यताम् | भक्ष्यता (२.१) | the state of being edible |
| एति | एति (√इ कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | attains |
| तथा | तथा | similarly |
| अन्येषां | अन्य (६.३) | of others |
| अपि | अपि | also |
| द्विज | द्विज (८.१) | O twice-born |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| भ | क्ष्यं | य | था | द्वि | जा | ती | नां |
| म | द्य | पा | नां | य | था | ह | विः |
| अ | भ | क्ष्यं | भ | क्ष्य | ता | मे | ति |
| त | था | न्ये | षा | म | पि | द्वि | ज |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.