अन्वयः
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मूषिका सूर्यम् पर्जन्यम् मारुतम् गिरिम् च भर्तारम् उत्सृज्य स्व-जातिम् प्राप्ता, यतः स्व-जातिः दुरतिक्रमा अस्ति ।
Summary
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Having rejected the sun, the cloud, the wind, and the mountain as husbands, the female mouse returned to her own kind; indeed, one's innate nature is difficult to transcend.
सारांश
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सूर्य, बादल, पवन और पर्वत को पति के रूप में ठुकराकर अंततः वह चुहिया अपनी ही जाति के चूहे को प्राप्त हुई; वास्तव में अपनी मूल जाति या स्वभाव को छोड़ना कठिन है।
पदच्छेदः
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| सूर्यम् | सूर्य (२.१) | the sun |
| भर्तारम् | भर्तृ (२.१) | the husband |
| उत्सृज्य | उत्सृज्य (उत्√सृज्+ल्यप्) | having abandoned |
| पर्जन्यम् | पर्जन्य (२.१) | the rain-god |
| मारुतम् | मारुत (२.१) | the wind-god |
| गिरिम् | गिरि (२.१) | the mountain |
| स्व-जातिम् | स्व–जाति (२.१) | her own species |
| मूषिका | मूषिका (१.१) | the mouse |
| प्राप्ता | प्राप्त (प्र√आप्+क्त, १.१) | obtained/returned to |
| स्व-जातिः | स्व–जाति (१.१) | one's own species |
| दुरतिक्रमा | दुर्–अतिक्रम (१.१) | difficult to overcome |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| सू | र्यं | भ | र्ता | र | मु | त्सृ | ज्य |
| प | र्ज | न्यं | मा | रु | तं | गि | रिम् |
| स्व | जा | तिं | मू | षि | का | प्रा | प्ता |
| स्व | जा | ति | र्दु | र | ति | क्र | मा |
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