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मित्ररूपा हि रिपवः सम्भाव्यन्ते विचक्षणैः ।
ये हितं वाक्यमुत्सृज्य विपरीतोपसेविनः ॥

अन्वयः AI ये हितम् वाक्यम् उत्सृज्य विपरीत-उपसेविनः भवन्ति, ते विचक्षणैः मित्र-रूपाः रिपवः हि सम्भाव्यन्ते ।
Summary AI Those who disregard beneficial advice and pursue what is harmful are considered by the wise to be enemies in the guise of friends.
सारांश AI विद्वान लोग मित्र के रूप में छिपे हुए उन शत्रुओं को पहचान लेते हैं जो हितकारी सलाह को छोड़कर हानिकारक और विपरीत आचरण का सहारा लेते हैं।
पदच्छेदः AI
मित्र-रूपाःमित्ररूप (१.३) friend-like in form
हिहि indeed
रिपवःरिपु (१.३) enemies
सम्भाव्यन्तेसम्भाव्यन्ते (सम्√भू भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. बहु.) are suspected/considered
विचक्षणैःविचक्षण (३.३) by the wise
येयद् (१.३) who
हितम्हित (२.१) beneficial
वाक्यम्वाक्य (२.१) word/advice
उत्सृज्यउत्सृज्य (उत्√सृज्+ल्यप्) having abandoned
विपरीत-उपसेविनःविपरीतउपसेविन् (१.३) practicing the opposite
छन्दः अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
मि त्र रू पा हि रि वः
म्भा व्य न्ते वि क्ष णैः
ये हि तं वा क्य मु त्सृ ज्य
वि री तो से वि नः
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