अन्वयः
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वैतसीम् वृत्तिम् कुर्वन् हि महतीम् श्रियम् प्राप्नोति, भुजङ्ग-वृत्तिम् आपन्नः केवलम् वधम् अर्हति ।
Summary
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By adopting the flexible nature of a reed, one attains great fortune; however, following the nature of a serpent leads only to destruction.
सारांश
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बेंत की तरह झुकने वाला स्वभाव रखने वाला व्यक्ति बड़ी संपत्ति प्राप्त करता है, जबकि सांप की तरह व्यवहार करने वाला केवल विनाश को प्राप्त होता है।
पदच्छेदः
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| कुर्वन् | कुर्वत् (√कृ+शतृ, १.१) | doing, adopting |
| हि | हि | indeed |
| वैतसीम् | वैतस (२.१) | reed-like |
| वृत्तिम् | वृत्ति (२.१) | conduct |
| प्राप्नोति | प्राप्नोति (प्र√आप् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | obtains |
| महतीम् | महत् (२.१) | great |
| श्रियम् | श्री (२.१) | prosperity |
| भुजङ्ग-वृत्तिम् | भुजङ्ग–वृत्ति (२.१) | snake-like conduct |
| आपन्नः | आपन्न (आ√पद्+क्त, १.१) | having adopted, fallen into |
| वधम् | वध (२.१) | death, destruction |
| अर्हति | अर्हति (√अर्ह् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | deserves |
| केवलम् | केवल | merely, only |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| कु | र्व | न्हि | वै | त | सीं | वृ | त्तिं |
| प्रा | प्नो | ति | म | ह | तीं | श्रि | यम् |
| भु | ज | ङ्ग | वृ | त्ति | मा | प | न्नो |
| व | ध | म | र्ह | ति | के | व | लम् |
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