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या ममोद्विजते नित्यं सा ममाद्यावगूहते ।
प्रियकारक भद्रं ते यन्ममास्ति हरस्व तत् ॥

अन्वयः AI या नित्यम् मम उद्विजते, सा अद्य माम् अवगूहते । प्रिय-कारक! ते भद्रम् अस्तु, मम यत् अस्ति तत् हरस्व ।
Summary AI She who always shrunk from me now embraces me. O doer of pleasant things, blessings to you! Take whatever I possess.
सारांश AI जो पत्नी मुझसे सदा दूर भागती थी, वह आज मेरा आलिंगन कर रही है। हे उपकारी चोर, तुम्हारा कल्याण हो, मेरे पास जो कुछ भी है वह तुम ले जाओ।
पदच्छेदः AI
यायद् (१.१) who
ममअस्मद् (६.१) my/to me
उद्विजतेउद्विजते (उद्√विज् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) shrinks from
नित्यम्नित्य always
सातद् (१.१) she
ममअस्मद् (६.१) my/to me
अद्यअद्य today
अवगूहतेअवगूहते (अव√गुह् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) embraces
प्रिय-कारकप्रियकारक (८.१) O doer of good
भद्रम्भद्र (१.१) welfare
तेयुष्मद् (६.१) to you
यत्यद् (२.१) which
ममअस्मद् (६.१) my
अस्तिअस्ति (√अस् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) is
हरस्वहरस्व (√हृ कर्तरि लोट् (आत्मने.) म.पु. एक.) take away
तत्तद् (२.१) that
छन्दः अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
या मो द्वि ते नि त्यं
सा मा द्या गू ते
प्रि का द्रं ते
न्म मा स्ति स्व तत्
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