अन्वयः
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ततः भृशम् बहु-निर्वेदवान् व्याधः प्राणि-हिंसाम् परित्यज्य हर्षाविष्टः सन् धनम् वनम् विवेश च ।
Summary
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Then the hunter, filled with intense detachment, abandoned the killing of living beings and, overcome with joy, entered the dense forest.
सारांश
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इसके बाद वह व्याध अत्यधिक वैराग्य को प्राप्त कर और प्राणियों की हिंसा का परित्याग कर घने वन में चला गया।
पदच्छेदः
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| हर्षाविष्टस्ततो | हर्ष–आविष्ट (१.१) | overcome with joy |
| व्याधो | व्याध (१.१) | the hunter |
| विवेश | वि (वि√वि)–विवेश (√विश् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | entered |
| च | च | and |
| वनं | वन (२.१) | forest |
| धनम् | घन (२.१) | dense |
| प्राणि-हिंसां | प्राणि–हिंसा (२.१) | violence towards living beings |
| परित्यज्य | परि (परि√परि)–परित्यज्य (√त्यज्+ल्यप्) | having abandoned |
| बहु-निर्वेदवान्भृशम् | बहु–निर्वेद–वत् (१.१) | greatly dispassionate |
| भृशम् | भृशम् | greatly |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ह | र्षा | वि | ष्ट | स्त | तो | व्या | धो |
| वि | वे | श | च | व | नं | ध | नम् |
| प्रा | णि | हिं | सां | प | रि | त्य | ज्य |
| ब | हु | नि | र्वे | द | वा | न्भृ | शम् |
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