अन्वयः
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कपोत-देहः सूर्य-अस्ते प्रत्यहम् सुखम् अन्वभूत् । कपोत-देह-वत् सा प्राक्-पुण्य-प्रभवम् हितम् आसीत् ।
Summary
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Every day at sunset, the pigeon enjoyed happiness. Like the pigeon's body, that welfare was the fruit of past meritorious deeds.
सारांश
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कपोत के शरीर के समान ही उसने सूर्यास्त के समय प्रतिदिन सुख का अनुभव किया; पूर्व जन्म के पुण्यों के प्रभाव से उसे कपोत के समान ही कल्याण प्राप्त हुआ।
पदच्छेदः
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| कपोत-देहः | कपोत–देह (१.१) | the pigeon-bodied (husband) |
| सूर्यास्ते | सूर्य–अस्त (७.१) | at sunset |
| प्रत्यहं | प्रति–अहन् | every day |
| सुखमन्वभूत् | सुख (२.१)–अनु (अनु√अनु)–अन्वभूत् (√भू कर्तरि लङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | experienced happiness |
| कपोत-देहवत्सासीत्प्राक्पुण्य-प्रभवं | कपोत–देह–वत् | like the pigeon-bodied (husband) |
| सा | तद् (१.१) | she |
| प्राक्पुण्य-प्रभवं | प्राक्–पुण्य–प्रभव (१.१) | originating from previous merit |
| हितम् | हित (१.१) | welfare |
| आसीत् | आसीत् (√अस् कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | was |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| क | पो | त | दे | हः | सू | र्या | स्ते |
| प्र | त्य | हं | सु | ख | म | न्व | भूत् |
| क | पो | त | दे | ह | व | त्सा | सी |
| त्प्रा | क्पु | ण्य | प्र | भ | वं | हि | तम् |
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