अन्वयः
AI
मानः दर्पः तु अहङ्कारः कुलम् बन्धुषु पूजा च दास-भृत्य-जनेषु आज्ञा वैधव्येन प्रणश्यति।
Summary
AI
Honor, pride, ego, noble birth, respect among relatives, and authority over servants all vanish when a woman faces widowhood.
सारांश
AI
विधवा होने पर स्त्री का मान, घमंड, अहंकार, कुल, बंधुओं में सम्मान और सेवकों पर आज्ञा, ये सब नष्ट हो जाते हैं।
पदच्छेदः
AI
| मानो | मान (१.१) | pride |
| दर्पस्त्वहङ्कारः | दर्प (१.१)–तु–अहङ्कार (१.१) | arrogance and egoism |
| कुलं | कुल (१.१) | lineage |
| पूजा | पूजा (१.१) | respect |
| च | च | and |
| बन्धुषु | बन्धु (७.३) | among relatives |
| दास-भृत्य-जनेष्वाज्ञा | दास–भृत्य–जन (७.३)–आज्ञा (१.१) | authority over servants and attendants |
| वैधव्येन | वैधव्य (३.१) | by widowhood |
| प्रणश्यति | प्र (प्र√प्र)–प्रणश्यति (√नश् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | perishes |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| मा | नो | द | र्प | स्त्व | ह | ङ्का | रः |
| कु | लं | पू | जा | च | ब | न्धु | षु |
| दा | स | भृ | त्य | ज | ने | ष्वा | ज्ञा |
| वै | ध | व्ये | न | प्र | ण | श्य | ति |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.