अन्वयः
AI
ततः लुब्धकेन मुक्ता आर्ता शोक-सन्तप्त-मानसा कपोती अग्नौ पतितम् पतिम् दृष्ट्वा विललाप।
Summary
AI
Released by the hunter, the female pigeon, tormented by grief, lamented as she saw her husband fallen into the fire.
सारांश
AI
शिकारी द्वारा छोड़े जाने पर कपोती ने अपने पति को अग्नि में गिरा हुआ देखा और वह शोक से संतप्त होकर विलाप करने लगी।
पदच्छेदः
AI
| लुब्धकेन | लुब्धक (३.१) | by the hunter |
| ततो | ततः | then |
| मुक्ता | मुक्त (√मुच्+क्त, १.१) | released |
| दृष्ट्वाग्नौ | दृष्ट्वा (√दृश्+क्त्वा) | having seen |
| पतितं | पतित (√पत्+क्त, २.१) | fallen |
| पतिम् | पति (२.१) | husband |
| कपोती | कपोती (१.१) | the female pigeon |
| विललापार्ता | वि (वि√वि)–विललाप (√लप् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | lamented |
| शोक-सन्तप्त-मानसा | शोक–सन्तप्त–मानस (१.१) | with a mind afflicted by grief |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| लु | ब्ध | के | न | त | तो | मु | क्ता |
| दृ | ष्ट्वा | ग्नौ | प | ति | तं | प | तिम् |
| क | पो | ती | वि | ल | ला | पा | र्ता |
| शो | क | स | न्त | प्त | मा | न | सा |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.