Loading data... On slow networks this could take a few minutes.
100%

अद्यप्रभृति देहं स्वं सर्वभोगविवर्जितम् ।
तोयं स्वल्पं यथा ग्रीष्मः शोषयिष्याम्यहं पुनः ॥

अन्वयः AI अहम् पुनः अद्य-प्रभृति स्वम् देहम् सर्व-भोग-विवर्जितम्, यथा ग्रीष्मः स्वल्प्म तोयम् (शोषयति, तथा) शोषयिष्यामि।
Summary AI "From this day forth, I will wither my body, renouncing all pleasures, just as the summer heat dries up a small pool of water."
सारांश AI आज से मैं अपने शरीर को सभी भोगों से रहित कर दूँगा और इसे उसी प्रकार सुखा दूँगा जैसे ग्रीष्म ऋतु थोड़े से जल को सुखा देती है।
पदच्छेदः AI
अद्य-प्रभृतिअद्यप्रभृति from today onwards
देहम्देह (२.१) body
स्वम्स्व (२.१) own
सर्व-भोग-विवर्जितम्सर्वभोगविवर्जित (२.१) devoid of all enjoyments
तोयम्तोय (२.१) water
स्वल्पम्स्वल्प (२.१) little
यथायथा just as
ग्रीष्मःग्रीष्म (१.१) summer
शोषयिष्यामिशोषयिष्यामि (√शुष् कर्तरि लृट् (परस्मै.) उ.पु. एक.) I shall dry up
अहम्अस्मद् (१.१) I
पुनःपुनर् again
छन्दः अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
द्य प्र भृ ति दे हं स्वं
र्व भो वि र्जि तम्
तो यं स्व ल्पं था ग्री ष्मः
शो यि ष्या म्य हं पु नः
About

Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.