अन्वयः
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सः अहम् पाप-मतिः च एव सदा पाप-कर्म-रतः, महा-घोरे नरके पतिष्यामि, अत्र संशयः न।
Summary
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"I, being evil-minded and always engaged in sinful acts, will undoubtedly fall into a terrible hell."
सारांश
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पापपूर्ण बुद्धि वाला और सदा पाप कर्मों में लगा रहने वाला मैं, निश्चित रूप से अत्यंत भयानक नरक में गिरूँगा, इसमें कोई संदेह नहीं है।
पदच्छेदः
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| सः | तद् (१.१) | that |
| अहम् | अस्मद् (१.१) | I |
| पाप-मतिः | पाप–मति (१.१) | evil-minded |
| च | च | and |
| एव | एव | indeed |
| पाप-कर्म-रतः | पाप–कर्मन्–रत (१.१) | devoted to sinful acts |
| सदा | सदा | always |
| पतिष्यामि | पतिष्यामि (√पत् कर्तरि लृट् (परस्मै.) उ.पु. एक.) | I shall fall |
| महा-घोरे | महा–घोर (७.१) | in a very terrible |
| नरके | नरक (७.१) | hell |
| न | न | not |
| अत्र | अत्र | here |
| संशयः | संशय (१.१) | doubt |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| सो | ऽहं | पा | प | म | ति | श्चै | व |
| पा | प | क | र्म | र | तः | स | दा |
| प | ति | ष्या | मि | म | हा | घो | रे |
| न | र | के | ना | त्र | सं | श | यः |
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