अन्वयः
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एवम् उक्त्वा सः धर्मात्मा प्रहृष्टेन अन्तरात्मना तम् अग्निम् सम्परिक्रम्य स्व-वेश्म-वत् प्रविवेश।
Summary
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With a joyful heart, the righteous pigeon circumambulated the fire and entered it as if it were his own home.
सारांश
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ऐसा कहकर उस धर्मात्मा कपोत ने प्रसन्न मन से अग्नि की परिक्रमा की और उसमें अपने घर की भाँति प्रवेश कर लिया।
पदच्छेदः
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| एवम् | एवम् | thus |
| उक्त्वा | उक्त्वा (√वच्+क्त्वा) | having said |
| सः | तद् (१.१) | he |
| धर्मात्मा | धर्म–आत्मन् (१.१) | the righteous-souled one |
| प्रहृष्टेन | प्रहृष्ट (३.१) | delighted |
| अन्तरात्मना | अन्तरात्मन् (३.१) | by his inner self |
| तम् | तद् (२.१) | that |
| अग्निम् | अग्नि (२.१) | fire |
| सम्परिक्रम्य | सम्परिक्रम्य (सम्+परि√क्रम्+ल्यप्) | having circumambulated |
| प्रविवेश | प्रविवेश (√प्रविश् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | entered |
| स्व-वेश्मवत् | स्व–वेश्मन्–वत् | as if entering his own house |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ए | व | मु | क्त्वा | स | ध | र्मा | त्मा |
| प्र | हृ | ष्टे | ना | न्त | रा | त्म | ना |
| त | म | ग्निं | स | म्प | रि | क्र | म्य |
| प्र | वि | वे | श | स्व | वे | श्म | वत् |
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