अन्वयः
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सः आत्मानम् किल निनिन्दि, तु तम् लुब्धकम् पुनः न (निनिन्दि), (सः) उवाच - त्वाम् तर्पयिष्ये, मुहूर्तम् प्रतिपालय।
Summary
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He reproached himself but not the hunter, then said, "I will satisfy you; wait but a moment."
सारांश
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उसने स्वयं की निंदा की, न कि उस शिकारी की। उसने कहा कि मैं तुम्हें तृप्त करूँगा, बस एक क्षण प्रतीक्षा करो।
पदच्छेदः
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| सः | तद् (१.१) | he |
| निनिन्दि | निनिन्दि (√निन्द् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | blamed |
| किल | किल | indeed/it is said |
| आत्मानम् | आत्मन् (२.१) | himself |
| न | न | not |
| तु | तु | but |
| तम् | तद् (२.१) | that |
| लुब्धकम् | लुब्धक (२.१) | hunter |
| पुनः | पुनर् | again |
| उवाच | उवाच (√वच् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | he said |
| तर्पयिष्ये | तर्पयिष्ये (√तृप् कर्तरि लृट् (आत्मने.) उ.पु. एक.) | I shall satisfy |
| त्वाम् | युष्मद् (२.१) | you |
| मुहूर्तम् | मुहूर्त (२.१) | for a moment |
| प्रतिपालय | प्रतिपालय (√प्रतिपाल् कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | wait |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | नि | नि | न्दि | कि | ला | त्मा | नं |
| न | तु | तं | लु | ब्ध | कं | पु | नः |
| उ | वा | च | त | र्प | यि | ष्ये | त्वां |
| मु | हू | र्तं | प्र | ति | पा | ल | य |
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