अन्वयः
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यः एकस्य अपि अतिथेः अन्नम् प्रदातुम् न शक्तिमान्, तस्य अनेक-परिक्लेशे गृहे वसतः किम् फलम्?
Summary
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What is the benefit of living in a house full of hardships for a person who cannot provide food even for a single guest?
सारांश
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जो व्यक्ति एक अतिथि को भी भोजन देने में समर्थ नहीं है, उसके कष्टों से भरे घर में रहने का क्या लाभ है?
पदच्छेदः
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| एकस्य | एक (६.१) | of one |
| अपि | अपि | even |
| अतिथेः | अतिथि (६.१) | of a guest |
| अन्नम् | अन्न (२.१) | food |
| यः | यद् (१.१) | who |
| प्रदातुम् | प्रदातुम् (प्र√दा+तुमुन्) | to give |
| न | न | not |
| शक्तिमान् | शक्तिमत् (१.१) | capable |
| तस्य | तद् (६.१) | his |
| अनेक-परिक्लेशे | अनेक–परिक्लेश (७.१) | in a house full of many troubles |
| गृहे | गृह (७.१) | in a house |
| किम् | किम् (१.१) | what |
| वसतः | वसत् (√वस्+शतृ, ६.१) | of one living |
| फलम् | फल (१.१) | fruit/benefit |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ए | क | स्या | प्य | ति | थे | र | न्नं |
| यः | प्र | दा | तुं | न | श | क्ति | मान् |
| त | स्या | ने | क | प | रि | क्ले | शे |
| गृ | हे | किं | व | स | तः | फ | लम् |
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