अन्वयः
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ततः (पावकम्) सुसन्दीप्तम् कृत्वा (सः) तम् शरणागतम् आह - अत्र निर्भयः विश्रब्धम् स्व-गात्राणि प्रतापयस्व।
Summary
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After lighting the fire, he told his guest to warm his limbs there without fear and with full confidence.
सारांश
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आग को अच्छी तरह जलाकर उसने उस शरणागत शिकारी से कहा कि तुम यहाँ निर्भय और निश्चिंत होकर अपने अंगों को तपाओ।
पदच्छेदः
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| सु-सन्दीप्तम् | सु–सन्दीप्त (२.१) | well-ignited |
| ततः | ततस् | then |
| कृत्वा | कृत्वा (√कृ+क्त्वा) | having made |
| तम् | तद् (२.१) | to him |
| आह | आह (√अह कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | said |
| शरणागतम् | शरणागत (२.१) | who had sought refuge |
| प्रतापयस्व | प्रतापयस्व (प्र√तप् +णिच् कर्तरि लोट् (आत्मने.) म.पु. एक.) | warm yourself |
| विश्रब्धम् | विश्रब्ध | trustingly/confidently |
| स्व-गात्राणि | स्व–गात्र (२.३) | your own limbs |
| अत्र | अत्र | here |
| निर्भयः | निर्भय (१.१) | fearless |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| सु | स | न्दी | प्तं | त | तः | कृ | त्वा |
| त | मा | ह | श | र | णा | ग | तम् |
| प्र | ता | प | य | स्व | वि | श्र | ब्धं |
| स्व | गा | त्रा | ण्य | त्र | नि | र्भ | यः |
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