अन्वयः
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यः सायम् प्राप्तम् अतिथिम् यथा-शक्ति न पूजयेत्, असौ तस्य दुष्कृतम् दत्त्वा सुकृतम् च अपकर्षति ।
Summary
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"He who does not honor a guest arriving in the evening according to his ability, that guest departs after giving him his sins and taking away his merits."
सारांश
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"जो व्यक्ति सायंकाल आए हुए अतिथि का सामर्थ्य अनुसार पूजन नहीं करता, वह अतिथि उसे अपने पाप देकर उसके पुण्यों को ले जाता है।"
पदच्छेदः
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| यः | यद् (१.१) | who |
| सायम् | सायम् | in the evening |
| अतिथिम् | अतिथि (२.१) | guest |
| प्राप्तम् | प्राप्त (√प्राप्+क्त, २.१) | arrived |
| यथा-शक्ति | यथा-शक्ति | according to one's ability |
| न | न | not |
| पूजयेत् | पूजयेत् (√पूज् कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | should honor |
| तस्य | तद् (६.१) | of him |
| असौ | अदस् (१.१) | that (guest) |
| दुष्कृतम् | दुष्कृत (२.१) | bad deed |
| दत्त्वा | दत्त्वा (√दा+क्त्वा) | having given |
| सुकृतम् | सुकृत (२.१) | good deed |
| च | च | and |
| अपकर्षति | अपकर्षति (अप√अपकृष् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | takes away |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| यः | सा | य | म | ति | थिं | प्रा | प्तं |
| य | था | श | क्ति | न | पू | ज | येत् |
| त | स्या | सौ | दु | ष्कृ | तं | द | त्त्वा |
| सु | कृ | तं | चा | प | क | र्ष | ति |
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