अन्वयः
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यस्याम् भर्ता न तुष्यति सा नारी दावाग्निना विदग्धा स-पुष्प-स्तवका लता इव भस्मी-भवतु ।
Summary
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"May that woman be reduced to ashes, like a flowering creeper consumed by a forest fire, in whom the husband does not find satisfaction."
सारांश
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जिस स्त्री से उसका पति संतुष्ट नहीं है, वह नारी फूलों के गुच्छों वाली लता के समान दावानल में जलकर भस्म हो जाए।
पदच्छेदः
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| दावाग्निना | दावाग्नि (३.१) | by forest fire |
| विदग्धा | विदग्ध (वि√दह्+क्त, १.१) | burnt |
| इव | इव | like |
| स-पुष्प-स्तवका | स–पुष्प–स्तवक (१.१) | with flowers and clusters |
| लता | लता (१.१) | creeper |
| भस्मीभवतु | भस्मीभवतु (√भू कर्तरि लोट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | may she turn into ashes |
| सा | तद् (१.१) | that |
| नारी | नारी (१.१) | woman |
| यस्याम् | यद् (७.१) | in whom |
| भर्ता | भर्तृ (१.१) | husband |
| न | न | not |
| तुष्यति | तुष्यति (√तुष् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | is pleased |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| दा | वा | ग्नि | ना | वि | द | ग्धे | व |
| स | पु | ष्प | स्त | व | का | ल | ता |
| भ | स्मी | भ | व | तु | सा | ना | री |
| य | स्यां | भ | र्ता | न | तु | ष्य | ति |
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