अन्वयः
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वृक्षान् छित्त्वा, पशून् हत्वा, रुधिर-कर्दमम् कृत्वा यदि एवम् स्वर्गम् गम्यते, नरकम् केन गम्यते?
Summary
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If heaven can be reached by cutting down trees, slaughtering animals, and creating a mire of blood, then by what means does one go to hell?
सारांश
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यदि वृक्षों को काटने, पशुओं की हत्या करने और रक्त की कीचड़ करने से स्वर्ग मिलता है, तो फिर नरक किस मार्ग से प्राप्त होता है?
पदच्छेदः
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| वृक्षान् | वृक्ष (२.३) | trees |
| छित्त्वा | छित्त्वा (√छिद्+क्त्वा) | having cut |
| पशून् | पशु (२.३) | animals |
| हत्वा | हत्वा (√हन्+क्त्वा) | having killed |
| कृत्वा | कृत्वा (√कृ+क्त्वा) | having made |
| रुधिर-कर्दमम् | रुधिर–कर्दम (२.१) | a mire of blood |
| यदि | यदि | if |
| एवम् | एवम् | thus |
| गम्यते | गम्यते (√गम् भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | one goes/is gone to |
| स्वर्गम् | स्वर्ग (२.१) | heaven |
| नरकम् | नरक (२.१) | hell |
| केन | किम् (३.१) | by whom |
| गम्यते | गम्यते (√गम् भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | one goes/is gone to |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| वृ | क्षां | श्छि | त्त्वा | प | शू | न्ह | त्वा |
| कृ | त्वा | रु | धि | र | क | र्द | मम् |
| य | द्ये | वं | ग | म्य | ते | स्व | र्गं |
| न | र | कं | के | न | ग | म्य | ते |
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