अन्वयः
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धर्म-सर्वस्वम् श्रूयताम्, श्रुत्वा च एव अवधार्यताम्, आत्मनः प्रतिकूलानि परेषाम् न समाचरेत् ।
Summary
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Listen to the essence of dharma, and having heard it, take it to heart: do not do unto others what is disagreeable to oneself.
सारांश
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धर्म के सर्वस्व को सुनकर हृदयंगम करें: जो व्यवहार स्वयं को बुरा लगे, वैसा आचरण दूसरों के साथ कदापि न करें।
पदच्छेदः
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| श्रूयताम् | श्रूयताम् (√श्रु भावकर्मणोः लोट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | let it be heard |
| धर्म-सर्वस्वम् | धर्म–सर्वस्व (२.१) | the essence of dharma |
| श्रुत्वा | श्रुत्वा (√श्रु+क्त्वा) | having heard |
| च | च | and |
| एव | एव | indeed |
| अवधार्यताम् | अवधार्यताम् (अव√धृ भावकर्मणोः लोट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | let it be grasped |
| आत्मनः | आत्मन् (६.१) | of oneself |
| प्रतिकूलानि | प्रतिकूल (२.३) | unfavorable |
| परेषाम् | पर (६.३) | to others |
| न | न | not |
| समाचरेत् | समाचरेत् (सम्+आ√चर् कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | one should practice |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| श्रू | य | तां | ध | र्म | स | र्व | स्वं |
| श्रु | त्वा | चै | वा | व | धा | र्य | ताम् |
| आ | त्म | नः | प्र | ति | कू | ला | नि |
| प | रे | षां | न | स | मा | च | रेत् |
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